प्रशासिनक सुधार एवं लोक शिकायतें


प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायतें

कार्मिक लोक शिकायतें और पेंशन मंत्रालय में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग, प्रशा‍सनिक सुधारों तथा विशेष रूप से केंद्रीय सरकार के संगठनों एवं सामान्‍य तौर पर राज्‍य तथा संघ राज्‍य क्षेत्र के प्रशासन से संबंधित लोक शिकायतों के समाधान के लिए सरकार की नोडल एजेंसी है। यह विभाग केंद्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों के लिए प्रबंधन परामर्शी सेवाओं की व्‍यवस्‍था करता है। विभाग विभिन्‍न प्रकाशनों और प्रलेखनों के जरिए प्रशासनिक सुधारों और लोक शिकायतों के समाधान संबंधी सरकार के महत्‍वपूर्ण कार्यकलापों के बारे में सूचना प्रदान करता है। यह विभाग लोक सेवा सुधारों को प्रोत्‍साहन देने के लिए अंतरराष्‍ट्रीय आदान प्रदान और सहयोग के क्षेत्र में भी कार्यकलाप करता है।
इस विभाग का अभियान केंद्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों, राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों के प्रशासनों, संगठनों और लोक समाज प्रतिनिधों के परामर्श से प्रक्रम पुन: अभियांत्रिकी, व्‍यवस्थित परिवर्तनों, शिकायत निपटान की सक्षम विधियां और व्‍यवस्‍था तथा आधुनिकीकरण को प्रोत्‍साहन देकर, नागरिक अधिकार पत्र, पुरस्‍कार योजनाओं, ई-शासन तथा सरकार की सर्वोत्‍तम प्रथाओं के माध्‍यम से सरकार की कार्यशैली में सुधार लाने के लिए एक सुविधा प्रदानकर्ता के रूप में कार्य करना है।
प्रशास‍निक कानूनों की समीक्षा पर मौजूदा कानूनों, विनियमों और प्रक्रिया विधियों के संशोधन हेतु प्रस्‍ताव को चिन्हित करने के विचार से 8 मई 1998 को प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा एक आयोग का गठन किया गया, जिनका अंतर-क्षेत्रीय प्रभाव है और जो सभी अप्रभावी कानूनों के निरसन के लिए भी कार्य करता है। विभिन्‍न मंत्रालयों/ विभागों ने 822 अधिनियमों को यथावत् रखने का निर्णय लिया (जिनमें 700 विनियोजन अधिनियम और 27 पुन: व्‍यवस्‍था अधिनियम शामिल हैं)। शेष बचे अधिनियम प्रसंस्करण के विभिन्‍न चरणों में हैं।
विभाग ने वर्ष 2005 में द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग का गठन श्री वीरप्‍पा मोइली की अध्यक्षता में लोक प्रशासन प्रणाली को नया रूप देने के लिए एक विस्‍तृत रूपरेखा तैयार करने के लिए किया है। यह आयोग देश में सरकार के सभी स्‍तरों पर एक सक्रिय उत्‍तरदायी, जवाबदेह, स्‍थायी और सक्षम प्रशासन लाने के उपाय सुझाएगा। आयोग का कार्यकाल 30 अप्रैल 2009 को समाप्त हो चुका है।
और अपनी रिपार्ट में आयोग ने निम्न 15 सुझाव पेश किए हैं:-

  1. सूचना का अधिकार – अच्‍छे शासन की मुख्‍य कुंजी (09.06.2006)
  2. मानव पूंजी को खोलना – पात्रता और शासन – एक प्रकरण अध्‍ययन (31.07.2006)
  3. संकट काल में प्रबंधन – निराशा से आशा की ओर (31.10.2006)
  4. शासन में नैतिकता (12.02.2007)
  5. जन आदेश- प्रत्‍येक के लिए न्‍याय ….. सभी के लिए शांति (25.06.2007)
  6. स्थानीय प्रशासन (27.11.2007)
  7. संघर्ष के समाधान के लिए क्षमता बढ़ाना – मतभेद से सम्मिलन की ओर (17.3.2008)
  8. आतंकवाद का मुकाबला (17.9.2008)
  9. सामाजिक पूंजी – एक साझी नियति (8.10.2008)
  10. वैयक्तिक प्रशासन का पुनर्गठन – नई उंचाइयों की प्राप्ति (27.11.2008)
  11. ई-प्रशासन को बढ़ावा – भविष्य की ओर सोचा समझा कदम (20.01.2009)
  12. जन केंद्रित प्रशासन – प्रशासन का हृदय (30.3.2009)
  13. भारत सरकार का संगठनात्मक ढ़ांचा (19.5.2009)
  14. वित्तीय प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत बनाना (26.5.2009)
  15. राज्य और जिला प्रशासन (29.5.2009)

आयोग की सिफारिशों के कार्यान्‍वयन की समीक्षा और निर्णयों के पालन में संबंधित मंत्रालयों / विभागों को मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए मंत्रियों के एक समूह का गठन किया गया है।
विभाग ने 2005 में केंद्र और राज्‍य सरकारों के अधिकारियों द्वारा किए गए असाधारण और नवाचारी कार्यों को मान्‍यता देने के लिए ”लोक प्रशासन में उत्‍कृष्‍टता के लिए प्रधान मंत्री पुरस्‍कार” की स्‍थापना भी की।

  1. एक पदक
  2. प्रशस्ति पत्र और
  3. 1,00,000 रु. का नकद पुरस्‍कार

अधिकारियों के समूह के मामले में समूह के लिए 5 लाख रु. का कुल पुरस्‍कार, जो प्रत्‍येक व्‍यक्ति को एक लाख रु. तक दिया जाता है। एक संगठन के लिए यह 5 लाख रु. तक सीमित होगी। केंद्र और राज्‍य सरकारों के सभी अधिकारियों को अगल अलग या समूह में या एक संगठन के रूप में पुरस्‍कार हेतु विचार में लिए जाने की पात्रता होगी। यह पुरस्‍कार प्रति वर्ष 21 मार्च को लोक सेवा दिवस के अवसर पर प्रदान किया जाता है।
ई-प्रशासन के तहत विभाग ई-कार्यालयों के गठन की प्रक्रिया से गुजर रहा है। राष्ट्रीय ई-प्रशासन योजना के अंतर्गत् यह एक प्रमुख परियोजना है। ई-कार्यालय के प्रयासों का लक्ष्य केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की कार्यशैली में तेजी ला कर इनकी कार्यक्षमता में अपेक्षित वृद्धि करना है। यह प्रयास जीपीआर के क्रियान्वयन में बहुत अहम होगा विशेषकर प्रशासन से प्रशासन के मध्य की प्रक्रिया में, जिसका असर आम जनता को मिलने वाली सेवा पर पड़ता है। यह विभाग परियोजना को लागू करने में नोडल एजेंसी की भूमिका निभा रहा है।
विभाग ई-प्रशासन पर एक वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किसी प्रदेश की राजधानी में करती है। जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, क्षेत्र के जानकार और विषय विशेषज्ञ भाग लेते हैं। इन सम्मेलनों में ई-प्रशासन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी वितरित किए जाते हैं। यह पुरस्कार ई-प्रशासन के तहत चलाए जा रही सरकारी प्रयासों के तहत बेहतर परिणाम, कुशलता, गुणवत्ता, सेवाओं की पूर्ति या इन सबके सम्मिलित परिणामों के लिए प्रदान किए जाते हैं।
विभाग ने सरकारी विभागों द्वारा सेवा आपूर्ति में उत्‍कृष्‍टता के मानदंड (सेवोत्तम) के लिए भी एक मॉडल का विकास किया है। इस परियोजना का मुख्‍य उद्देश्‍य सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे नागरिकों के अनुभवों का प्रयोग कर नागरिक संहिता में इनके प्रतिमान स्थापित करना है। तय मानदंडों पर यह प्रक्रिया कितनी खरी उतर रही है, इसकी जांच की जाती है और इसकी कार्यकुशलता का भी पता लगाया जाता है। इस माडल का उद्देश्य उत्‍कृष्‍टता के प्रभावी कार्यान्‍वयन के माध्‍यम से नागरिकों के दृष्टिकोण से सेवा आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार करना है। इस मॉडल को सभी केन्‍द्रीय मंत्रालयों/विभागों में कार्यान्वित किया जाना है।
द्वितीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने सेवात्तम माडल का अध्ययन करने के बाद इसे सही दिशा में उठाया गया एक कदम बताया था। इसके साथ ही आयोग ने केंद्र और सभी राज्य सरकारों द्वारा इस सात चरणीय माडल को अपने उन सभी संस्थाओं में लागू करने की अनिवार्यता सुनिश्चित करने की बात कही जहां कहीं भी आम जनता सीधे संपर्क में आती है। वर्तमान में प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत दस केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में यह माडल चला रखा है। इनमें से डाक विभाग में पायलट प्रोजेक्ट पूरा भी हो चुका है। और मार्च 2008 के लिए गोल डाकखाना, नई दिल्ली को सबसे पहला सेवोत्तम प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। शेष नौ विभागों में पायलट प्रक्रिया विभिन्न चरणों में है।
प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग देश में अच्‍छी शासन प्रथाओं को प्रोत्‍साहन देने के लिए अधिदेशित है। सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रलेखन, इनक्‍यूबेशन और प्रसार इसकी संकल्‍पना और अभियान वक्‍तव्‍य में निहित कार्यों में से हैं। इसके पालन और देश में अच्‍छे शासन को प्रोत्‍साहन देने के लिए विभाग ने अनेक दिशाओं वाली कार्य नीतियां अपनाई हैं। प्रकाशन, गो‍ष्ठियों का आयोजन, क्षेत्रीय सम्‍मेलन, प्रस्‍तुतीकरण के आयोजन, व्‍याख्‍यान श्रृंखला आयेजित करना और लघु फिल्‍में का निर्माण जैसे कामों के द्वारा जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है।
अपने नियमित प्रकाशनों ”मैनेजमेंट इन गवर्नमेंट एक तिमाही जर्नल” और ”सिविल सर्विस न्‍यूज़ – एक मासिक समचार पत्रिका” के माध्‍यम से सर्वोत्तम प्रथाओं के बारे में विभाग जागरूकता लाता है। इसके अलावा इसके द्वारा पांच पुस्‍तकें ”आइडिया दैट हेव वर्क्‍ड”, ”लर्न फ्रॉम दैम” , ” स्पेल्न्डर इन द ग्रास”, ” रूफलेस टावर” और ”बीवायओबी- ब्रिंग योर बाइट” भी प्रकाशित की गई हैं। इन किताबों में कुछ नया करने की सोच रखने वालों की सफलता और असफलता के अनुभव साझा किए गए हैं।
‘गवर्नेंस नालेज सेंटर’ नामक एक पोर्टल, जिसमें की अब तक के उपयोगी व्यावहारिक कदमों की जानकारी दी गई है, का निर्माण किया गया है। ताकि इन कदमों का अनुसरण करके अच्छे परिणाम प्राप्त करने में आसानी हो। विभाग ने 1812 से प्रशासनिक सुधारों पर 73 चुने हुए आयोगों / समितियों की रिपोर्ट के वाली एक डीवीडी भी तैयार की है।

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Posted on May 31, 2011, in प्रशासिनक सुधार एवं लोक शिकायतें. Bookmark the permalink. Leave a comment.

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